Sunday, 16 December 2012

माँ के चरण देखे एक अरसा बीत गया

माँ की दवाई का खर्चा, उसे मज़बूरी लगता है उसे सिगरेट का धुंआ, जरुरी लगता है || फिजूल में रबड़ता , दोस्तों के साथ इधर-उधर बगल के कमरे में, माँ से मिलना , मीलों की दुरी लगता है || वो घंटों लगा रहता है, फेसबुक पे अजनबियों से बतियाने में अब माँ का हाल जानना, उसे चोरी लगता है || खून की क...

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